गाजियाबाद,
मूल रूप से सीकर राजस्थान का रहने वाला राजू कितना शातिर ठग व पेशेवर चोर है इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है किवह चोरी करने के लिये एक प्लॉन तैयार करता था।
उस प्लॉन के तहत वह ऐसा परिवार तलाशता था कि जिसका बेटा दो-तीन दशक पहले लापता हो गया हो। उसके बाद वह उस परिवार की कुंडली खंगालने के साथ-साथ उनके खोये हुए बच्चे की आदतों की भी जानकारी भी कर लेता था। फिर वह पूरी प्लॉन के साथ अपने टारगेट वाले घर अथवा उस स्थान के थाने पर पहुंच जाता। कुछ समय रहने के बाद जब परिवार उसके साथ रमने लगता तो उसका फायदा उठाकर वह वहां पर रखे पैसे व आभूषणों के अलावा सामान पर हाथ साफ करके रफूचक्कर हो जाता।
पुलिस के मुताबिक राजू अब तक राजस्थान, यूपी व उत्तराखण्ड़ में रहने वाले आधा दर्जन से अधिक परिवारों को अपने मक्कडज़ाल में फंसाकर उन्हें कंगाल बना चुका है। बाहराल राजू के ऊपर भी यह कहावत चरितार्थ हो ही गई सौ दिन चोर के और एक दिन साद का भी होता है।