Thursday, April 3, 2025
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दिल्ली एनसीआर में बीएस 3 और बीएस 4 वाहनों पर लगा पूर्ण प्रतिबंध

by POOJA BHARTI
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नई दिल्ली।

दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण का बढ़ता प्रभाव नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव और फरीदाबाद के वाहनों पर पड़ रहा है। वायु प्रदूषण से पीड़ित दिल्ली में आतिशी सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया गया है। जिसमें लगभग 5 लाख पुराने वाहनों प्रतिबंध लगाया गया है। यह कदम दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रण में लाने के लिए लिया गया है, जिसके तहत बीएस III (पेट्रोल और डीजल) और बीएस IV (डीजल) वाहनों पर पूर्ण रूप से बैन लगाया जाएगा। इसी के साथ NCR में भी इन्हीं वाहनों पर पूरी तरह रोक रहेगी। नियम का उल्लंघन करने वाले पर 20,000 का जुर्माना लगाया जाएगा।

सी एंड डी वेस्ट का खुला भंडारण भी प्रदूषण की बड़ी वजह:

हालांकि प्रशासन इस नियम को सख्ती से लागू करने की बात कर रहा है, लेकिन आम जनता को इससे भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। सार्वजनिक परिवहन की कमजोर व्यवस्था के कारण लोगों के सामने रोज़मर्रा की यात्राओं के लिए विकल्प खोजने की चुनौती खड़ी हो गई है। सेक्टर-51 के निवासी राकेश कुमार का कहना है कि वाहन प्रदूषण तो सिर्फ एक कारण है, लेकिन शहर में चल रहे अनियंत्रित निर्माण कार्य और सी एंड डी वेस्ट का खुला भंडारण भी प्रदूषण का बड़ा कारण है।

एनसीआर में वाहनों के आंकड़े:

आंकड़ों के अनुसार, अकेले गौतमबुद्ध नगर में 1.8 लाख और गाजियाबाद में 2 लाख ऐसे वाहन हैं जो इस प्रतिबंध की श्रेणी में आते हैं। नोएडा में कुल 10.4 लाख पंजीकृत वाहनों में से, बीएस III श्रेणी के अंतर्गत 96,210 पेट्रोल और 41,067 डीजल वाहन हैं, जबकि 41,516 बीएस IV डीजल वाहन पंजीकृत हैं। गाजियाबाद की स्थिति भी चिंताजनक है, जहां 1.7 लाख बीएस III वाहनों में से 1.6 लाख पेट्रोल और 10,931 डीजल वाहन हैं, साथ ही 75,651 वाहन बीएस IV डीजल श्रेणी में आते हैं।

गाजियाबाद आरटीओ ने क्या कहा?

प्रशासन की ओर से नोएडा के सहायक आरटीओ (प्रवर्तन) उदित नारायण पांडे ने बताया कि विभाग आरडब्ल्यूए और एओए के माध्यम से लोगों को जागरूक करेगा और प्रतिबंधित वाहनों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। गाजियाबाद आरटीओ पीके सिंह ने भी इस नियम को सख्ती से लागू करने की बात कही है। लगातार तीन दिनों से दोनों शहरों में वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज की जा रही है, जिससे यह कदम और भी महत्वपूर्ण हो गया है। इस फैसले से प्रभावित लोगों का कहना है कि सरकार को पहले सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए था।

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