नई दिल्ली।
13 नवंबर को राजस्थान के टोंक जिले के देवरी उनियाला विधानसभा सीट पर मतदान हुआ। इस दौरान एक विवादास्पद मामला सामने आया है। जिसने इस विधानसभा सीट को देश भर में चर्चा का विषय बना दिया। निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा ने मतदान के दौरान सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को थप्पड़ जड़ दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
गांव वालों का मतदान बहिष्कार और नरेश मीणा का आरोप
देवरी-उनियारा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली कचरावता ग्राम पंचायत के समरावत गांव के लोगों ने मतदान का बहिष्कार कर दिया था। उनका आरोप था कि उनका गांव पहले उनियारा उपखंड में था, लेकिन पिछली सरकार ने इसे देवली उपखंड में शामिल कर लिया था। गांव वाले इस फैसले से नाराज थे और मांग कर रहे थे कि समरावत गांव को फिर से उनियारा में जोड़ा जाए। पुलिस का कहना है कि नरेश मीणा गांववालों पर मतदान का बहिष्कार करने का दबाव बना रहे थे। इसी पर नरेश मीणा और एसडीएम के बीच बहस बढ़ गई और विवाद ने उग्र रूप ले लिया।
एसडीएम को थप्पड़ मारने के बाद पुलिस कार्रवाई
गर्मी बढ़ने पर नरेश मीणा ने एसडीएम को थप्पड़ मार दिया। निर्दलीय उम्मीदवार ने आरोप लगाया कि एसडीएम की देखरेख में फर्जी मतदान किया जा रहा था। पुलिस ने नरेश मीणा को गिरफ्तार कर लिया और गांव में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़े प्रबंध किए गए। जब पुलिस नरेश मीणा को गिरफ्तार करने समरावता गांव पहुंची, तो उसके समर्थकों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। लाठीचार्ज के बाद दोनों पक्षों में हिंसा बढ़ी, और फायरिंग भी शुरू हो गई। स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
इस मामले में पुलिस ने चार एफआईआर दर्ज की हैं और अब तक 60 लोगों को गिरफ्तार किया है।
क्या हाथ उठाना अपराध है?
हां, किसी लोकसेवक पर हाथ उठाना भारतीय न्याय संहिता (IPC) के तहत अपराध है। धारा 132 के अनुसार, यदि कोई शख्स किसी सरकारी सेवक पर जब वह अपनी ड्यूटी निभा रहा हो, बल प्रयोग करता है, तो उसे सजा हो सकती है। यह अपराध आईपीसी की धारा 195(1) के तहत दर्ज किया जाता है।
दोषी को मिल सकती है सजा
अगर कोई शख्स लोकसेवक पर हमला करता है या उसे अपनी जिम्मेदारी निभाने से रोकने के लिए बल प्रयोग करता है, तो उसे तीन साल तक की कैद या 25 हजार रुपये का जुर्माना हो सकता है। लोकसेवकों को बिना किसी रुकावट के अपनी ड्यूटी निभाने का अधिकार है, और इस अधिकार की रक्षा के लिए यह सजा दी जाती है।