Friday, April 4, 2025
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बांग्लादेश में मोदी का गिफ्ट हुआ चोरी, देवी काली का कीमती मुकुट गायब

by POOJA BHARTI
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जेशोरेश्वरी मंदिर।

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़ने की खबरें आम हो चुकी हैं, और अब हाल ही में एक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। बांग्लादेश के जेशोरेश्वरी काली मंदिर से देवी काली का कीमती मुकुट चोरी हो गया है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन साल पहले 2021 में अपने दौरे के दौरान तोहफे के रूप में भेंट किया था।

मुकुट की अहमियत और चोरी की घटना

बांग्लादेशी अखबार डेली स्टार के अनुसार, यह मुकुट चांदी से बना था और उस पर सोने की परत चढ़ाई गई थी। घटना गुरुवार को दोपहर 2:00 बजे से 2:30 बजे के बीच हुई। उस वक्त मंदिर के पुजारी दिलीप मुखर्जी पूजा समाप्त करके मंदिर से बाहर चले गए थे। जब सफाई कर्मचारी मंदिर में पहुंचे, तो उन्होंने पाया कि देवी काली के सिर से मुकुट गायब हो चुका है।

श्यामनगर पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर तैजुल इस्लाम ने कहा कि पुलिस मंदिर के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है ताकि अपराधियों की पहचान की जा सके। यह मुकुट धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण था क्योंकि जेशोरेश्वरी मंदिर 51 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है, जो हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखते हैं।

नवरात्रि के दौरान हुई चोरी

चोरी की यह घटना ऐसे समय में हुई है जब हिंदू समुदाय नवरात्रि मना रहा है। यह पर्व मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा के लिए समर्पित होता है, जिसमें मां काली का रूप भी शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2021 में अपनी बांग्लादेश यात्रा के दौरान इस मुकुट को देवी काली के चरणों में अर्पित किया था, जो धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से भारत-बांग्लादेश संबंधों को मजबूत करने का प्रतीक था।

जेशोरेश्वरी मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

सातखिरा जिले के ईश्वरीपुर में स्थित जेशोरेश्वरी मंदिर का इतिहास भी बेहद प्राचीन है। इसे 12वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में एक ब्राह्मण, अनारी, ने बनवाया था। बाद में 16वीं शताब्दी में राजा प्रतापदित्य ने इसका पुनर्निर्माण करवाया। यह मंदिर अपनी स्थापत्य कला और धार्मिक महत्व के कारण भारत और पड़ोसी देशों में प्रसिद्ध है।

पीएम मोदी का मंदिर के विकास का वादा

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दौरे के दौरान इस मंदिर में एक बहुउद्देशीय सामुदायिक हॉल बनाने का वादा भी किया था। उन्होंने कहा था कि यह हॉल स्थानीय लोगों के लिए सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक आयोजनों के लिए काम आएगा। इसके अलावा, प्राकृतिक आपदाओं के समय यह एक आश्रय स्थल के रूप में भी काम करेगा।

यह चोरी न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है, बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी सवाल खड़े करती है। अब देखना यह है कि बांग्लादेशी सरकार इस मामले पर क्या कदम उठाती है।

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