वाराणसी।
यूपी स्थित भगवान शिव की नगरी वाराणसी(काशी) में एक नया बवाल सामने आया है जिसमे वाराणसी के 14 मंदिरों में से शिरडी वाले साईं बाबा की प्रतिमाओं को हटाया जा रहा है। सनातन रक्षक दल नाम के संगठन ने मंगलवार को वाराणसी के 10 मंदिरों से साईं बाबा की मूर्तियां हटा दी हैं। इनमें काशी का मशहूर बड़ा गणेश मंदिर और पुरुषोत्तम मंदिर भी शामिल है। इसके चलते विवाद शुरू हो गया है और इसी दौरान सनातन रक्षक दल की तरफ से एक बयान सामने आया है कि हम साईं विरोधी नहीं हैं, लेकिन हिंदू मंदिर में किसी इंसान की मूर्ति का स्थापन और पूजन दोनो ही वर्जित हैं, इसलिए मंदिर प्रबंधन से अनुमति मिलने के बाद ही साईं मूर्ति को हटाया जा रहा हैं। इससे पहले भी मंदिरों में साईं बाबा की मूर्ति पूजन को लेकर कई बार विवाद हो चुका है। शंकराचार्य स्वरुपानंद सरस्वती ने भी इसे लेकर अभियान चलाया था, जबकि पिछले दिनों बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र शास्त्री ने भी साईं पूजा का विरोध किया था।
मंदिरों में इंसानी मूर्ति की पूजा करना मान्य नहीं: सनातन रक्षक दल
सनातन रक्षक दल ने कहा है कि हिंदू मंदिर में केवल शास्त्रों के हिसाब से ही पूजा की जा सकती है। मंदिरों में इंसानी प्रतिमा स्थापन कर उनका पूजन करना मान्य नहीं है। इसलिए हम मंदिर प्रबंधनों से बात कर पूरे सम्मान के साथ साईं मूर्तियों को वहां से दूसरी जगह ले जा रहे हैं। हम साईं विरोधी नहीं हैं। बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र शास्त्री ने भी कुछ दिन पहले कहा था कि मैं साईं बाबा का विरोधी नहीं हूं। उन्हें महात्मा के रूप में पूजने पर ऐतराज नहीं है। लेकिन उन्हें भगवान के तौर पर नहीं पूजा जा सकता है।

सनातन रक्षक दल ने वाराणसी के मदिरों में स्थापित साईं मूर्तियों को कपड़े में लपेटकर हटाना शुरू किया है। सबसे पहले बड़ा गणेश मंदिर से साईं मूर्ति हटाई गई है। इसके बाद बाकी मंदिरों से भी मूर्तियां हटानी शुरू कर दिया गया है। यह अभियान अगले कई दिन जारी रहने का ऐलान किया गया है।
महाराष्ट्र में साईं बाबा का सबसे बड़ा मंदिर, चढ़ता है करोड़ों का चढ़ावा
महाराष्ट्र का शिरडी जहां पर साईं बाबा का जीवन बीता और वर्तमान में वहां साईं बाबा का बहुत बड़ा मंदिर है, जिसमें लाखों श्रद्धालु हर साल पहुंचते हैं और करोड़ों रुपये का चढ़ावा चढ़ता है। इससे पहले भी शिरडी साईं बाबा को हिंदू भगवान की तरह पूजने पर विवाद हो चुका है।शंकराचार्य स्वरुपानंद सरस्वती भी कह चुके हैं कि साईं बाबा को भगवान की तरह नहीं पूजा जाना चाहिए। साईं बाबा के हिंदू या मुस्लिम होने को लेकर भी बहुत विवाद रहा है। उनका विरोध करने वाले उन्हें मुस्लिम और उनका नाम चांद मियां बताते हैं, लेकिन इसे लेकर कहीं कोई लिखित दस्तावेज नहीं है। साईं बाबा शिरडी में किसी और स्थान से आए थे, जहां वे पुरानी मस्जिद में रहे थे। इस मस्जिद को वे द्वारका माई कहकर पुकारते थे। उनका वेश मुस्लिम सूफी दरवेश जैसा था, लेकिन बात वे हिंदू देवी-देवताओं की करते थे। इस कारण उनके धर्म को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं है। उनके श्रद्धालुओं में हिंदू और मुस्लिम, दोनों ही धर्म के लोग शामिल थे। साथ ही वे जात-पांत के भेदभाव को भी नहीं मानते थे।