Friday, April 4, 2025
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नोएडा में फर्जी एआई ट्रेडिंग साफ्टवेयर बनाकर किया प्रचार

by POOJA BHARTI
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100 प्रतिशत दावा मिलेगा मुनाफा, डूब गए करोड़ों, कंपनियां बनाकर चला रहे थे कॉलसेंटर, पांच गिरफ्तार


नोएडा।

फर्जी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एल्गो ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर के नाम पर ठगी करने वाले पांच लोगों को थाना सेक्टर-63 पुलिस ने गिरफ्तार किया है। ये इसमें एक महिला भी शामिल है। ये रोबोटेकप्रो आईटी एलएलपी एवं इंट्राविजर टेक्नोलॉजीज (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के नाम से साफ्टवेयर का फर्जी का प्रचार फेसबुक, इंटाग्राम, लिंक्डइन आदि सोशल मिडिया प्लेटफोर्म पर करते थे। इन्ही के नाम पर शेयर ट्रेडिंग कराते थे। ये फर्जीवाड़ा कॉलसेंटर खोलकर किया जा रहा था। मौके से 33 लैपटॉप, 23 की पैड मोबाइल, 10 एन्ड्रोइड मोबाइल फोन बरामद किया गया। एडीसीपी हृदेश कठेरिया ने बताया कि तेलंगाना निवासी कामिनी वेनू ने थाना सेक्टर-63 पुलिस से शिकायत की थी कि उसने इंस्टाग्राम पर रोबोटेकप्रो आईटी एलएलपी कंपनी का विज्ञापन देखा। जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ट्रेडिंग साफ्टवेयर के बारे में बताया गया। प्रलोभन में आकर 35,000 का पैकेज लिया। जिसमें उसको 02 लाख का नुकसान हुआ। कंपनी की ओर दावा किया जाता था कि इस साफ्टवेयर के जरिए ट्रेडिंग करने पर पैसा डूबेगा नहीं। कंपनी को ओर से कामिनी को कहा गया कि 03 लाख का पैकेज ले लो, सभी नुकसान की पूर्ति हो जायेगी। जब कामिनी ने 03 लाख का पैकेज ले लिया गया लेकिन उसे दोबारा से नुकसान हो गया। उसके बाद शिकायतकर्ता से बताया गया कि आप 05 लाख का पैकेज ले लीजिए जिससे आपके सभी नुकसान की भरपाई हो जाएगी। शक होने पर उन्होंने पुलिस से शिकायत की। इस मामले में अमर सिंह बौद्ध, पुरुषोत्तम, प्रमोद, दीपक कुमार, एकता को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा कंपनी के डायरेक्टर रोबिन चंदेल, रुपाली अग्रवाल, शिवम अग्रवाल कंपनी की एचआर प्रेरणा मोर्या, सेल्स मैनेजर शालिनी अभी फरार है। पुलिस की कई टीम गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है। एडीसीपी हृदेश कठेरिया ने बताया कि ये लोग शेयर ट्रेडिंग करने वालों को झांसे में लेकर बताते थे कि हमारे पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एल्गो ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर है। जो शेयर बाजार के विभिन्न टेक्निकल फाइनेंशियल डेटा को एनालाइज करके शेयर चुनता है और फिर उस पर शेयर ट्रेडिंग करता है। इनके द्वारा बनाये गये एल्गो सॉफ्टवेयर द्वारा ग्राहकों को मार्केट एनालेसिस करके अधिक से अधिक मुनाफा कमाकर देने का दावा किया जाता था। जिसका प्रचार दोनों कंपनियों के नाम पर करते थे। सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक, इन्सटाग्राम, लिंक्डइन पर किए गये इन लोगों के प्रचार-प्रसार को देखकर ग्राहक इनके एड पर अपनी डिटेल डाल देते थे। जिसके बाद इनके सेल्स वाले कॉल करके ग्राहकों से सम्पर्क करते थे। उन्हें प्रलोभित करके अपना सॉफ्टवेयर की सविर्स यूज के लिये बोलते थे। जिसका यह लोग 14,000 से 1 लाख 20,000 रुपये तक वसूल करते थे। जब ग्राहक प्रलोभित हो जाता था तो इन लोगों द्वारा उससे सॉफ्टवेयर के सर्विस चार्ज के रूप में 11 हजार 999 प्रति माह, 18 प्रतिशत जीएसटी कुल करीब 14000 रुपए प्रति माह के रूप में ले लिया जाता था। साफ्टवेयर को लॉगिन करने के लिए ग्राहकों को एक लिंक मेल के माध्यम से भेज दिया जाता था। जिस पर क्लिक करके ग्राहकों को अपना आईडी व पासवर्ड डालना होता था। जिससे इन लोगों को पता चल जाता था कि ग्राहक हमारी कंपनी से जुड़ गया है। इसके बाद ग्राहक को एक शेयर इंडैक्स या लॉट बता दिया जाता था। जो ग्राहक इन लोगों द्वारा भेजे गये सॉफ्टवेयर पर भर देता था। उसे कितनी संख्या में खरीदना है ये भी भर देता था। जिसके बाद सॉफ्टवेयर ग्राहक द्वारा भरे गये डेटा के अनुसार ट्रेडिंग करता था। इसमें कही भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग नहीं होता था। इसके बाद जब ग्राहक को ज्यादा नुकसान हो जाता था ओर वह कंपनी से अपने पैसे वापस मांगता था। पैसे देने से मना कर दिया जाता था। इसके बाद इनकी दूसरी कंपनी Iएनट्राविज़र टेक्नोलॉजीज (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड के लोग उन्ही ग्राहक को कॉल करते थे और रोबोटेकप्रो आईटी एलएलपी की बुराई करते हुए कहते थे कि आप हमारी कंपनी के सॉफ्टवेयर से ट्रेडिंग करिए। जिसमें निश्चित ही आपको लाभ होगा। जबकि दोनों की कंपनियां एक ही लोग संचालित कर रहे थे। इस तरह से ग्राहक फंस जाए तो उसे भी ठग लेते थे। यानी एक ग्राहक से दो बार ठगी होती थी। आरोपियों से पूछा गया कि जब शेयर का नाम एव खरीदने की संख्या आप लोग ही ग्राहको को बता रहे थे। इसमे एल्गो या एआई का प्रयोग कहा किया गया। इस पर बताया कि एल्गो या एआई का कोई प्रयोग नहीं है। शेयर मार्केट में पैसा लगवाने से पहले एनालेसिस करने के सम्बन्ध में जानकारी की गयी तो बताया गया कि हमारा कही कोई मार्केट रिसर्च नहीं होता था। हम लोग ऐसे ही कोई भी शेयर ग्राहको को बता देते थे, जिस पर ग्राहक अपना पैसा लगा देते थे। जब हमारे द्वारा बताये गये शेयर पर ग्राहक को नुकसान हो जाता था तो हम उससे कहते थे कि आप हमारे सॉफ्टवेयर का अपग्रेडिड वर्जन ले लीजिए, जिसमे मुनाफ के अवसर ओर अधिक बढ जाते है।

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