नई दिल्ली।
पर्ल ग्रुप ऑफ कंपनीज के मालिक निर्मल सिंह भंगू का रविवार को निधन हो गया। वो करोड़ों रुपये की ठगी मामले में 2016 से तिहाड़ जेल में बंद था। शनिवार को उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल ले जाया गया था जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
वेस्ट जिले के डीसीपी विचित्र वीर ने निर्मल सिंह भंगू की मौत की पुष्टि की। उनका इलाज काफी समय से चल रहा था। उन पर पर्ल ग्रुप की कंपनी के नाम पर चिट फंड के जरिए करोड़ों रुपये की ठगी का आरोप था। घोटाले के आरोप में सीबीआई ने 8 जनवरी 2016 को गिरफ्तार किया था।
दूध बेचने से लेकर करोड़ों की ठगी तक का सफर:
जानकारी के अनुसार निर्मल सिंह भंगू पंजाब के बरनाला जिले के रहने वाले था। शुरू में वह एक दूधिया के तौर पर इलाके में अलग-अलग गांव जाकर दूध बेचा करते था। 70 के दशक में रोजगार की तलाश में वह कोलकाता पहुंचा और नामी कंपनी पियरलेस में काम किया। बाद में वो हरियाणा की एक कंपनी फॉरेस्ट इंडिया लिमिटेड में काम करने आ गया, हालांकि इस कंपनी पर भी करोड़ों रुपये की ठगी करने का आरोप लगा था और कुछ वक्त बाद यह कंपनी भी बंद हो गई।
फिर 1980 में उन्होंने पर्ल गोल्डन फॉरेस्ट नाम से खुद की कंपनी बनाई और लोगों को सागवान सहित अन्य पेड़ो में इन्वेस्ट करने पर अच्छा खासा लाभ देकर पैसा लौटने की बात कही। उनके झांसे में आकर लोग पैसे इन्वेस्ट करने लगे और उन्होंने डेढ़ दशक में करोड़ों रुपये कमा लिए। इसी बीच उनकी कंपनी की गड़बड़ी की बात सामने आने के बाद इनकम टैक्स के साथ-साथ दूसरी एजेंसियों ने जांच शुरू की और कंपनी बंद हो गई। देश के अलग-अलग इलाकों से लोगों ने कंपनी के खिलाफ ठगी की शिकायत की थी। जिसके बाद जांच आगे बढ़ी और उनकी कंपनी का फ्रॉड सबके सामने आया।