उज्जैन/कानपुर।
Offer ‘clock’ in this temple, ‘bad times’ get cured :- कहा जाता है कि इंसान का बुरा वक्त आते ही उसके रिश्तों,मित्रों और चरित्र की पहचान होती है। अपने बुरे वक्त को टालने के लिए इंसान क्या क्या जतन नहीं करता। लेकिन आस्था और विश्वास के देश भारत में एक ऐसा भी मंदिर है , जहां वक़्त ठीक होने का तमाम कथाएं प्रचलित हैं। खास बात ये कि इस मंदिर में और कुछ नहीं बुरा वक़्त ठीक करने के लिए घड़ियां चढ़ाई जाती हैं।
उज्जैन में स्थित इस मंदिर को उज्जैन के घड़ी बाबा वाले मंदिर के नाम से जाना जाता है। जहां प्रसाद में घड़ियां चढ़ाई जाती हैं। हालांकि ऐसे ही मंदिर गुजरात और कानपुर में भी हैं।
उज्जैन में शिप्रा नदी के तट पर है मंदिर:
उज्जैन से 50 किलोमीटर दूर स्थित उन्हेल से महिदपर रोड के बीच पड़ने वाले गांव गुराडिया सगस में भैरव मंदिर है। यह मंदिर शिप्रा नदी के तट पर स्थित है। इस मंदिर को घड़ी वाले बाबा के नाम से जाना जाता है। यहां घड़ी बांधने भक्त दूर-दूर से आते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर में घड़ी बांधने से बुरा वक्त दूर हो जाता है।
कानपुर में है समय देव का मंदिर:
वहीं कानपुर के नवाबगंज में एक ऐसा ही मंदिर है , जिसे समय देव मंदिर के नाम से जाना जाता है। बताया जाता है कि यह मंदिर करीब 80 साल पुराना है। इस मंदिर की खास विशेषता यह है कि यहां पर आने वाले भक्त पूजा में प्रसाद नहीं बल्कि घड़ी चढ़ाते हैं।
गुजरात में मन्नत पूरी होने पर हुई स्थापना:
कानपुर स्थित समय देव के मंदिर के पुजारी विष्णु देव बताते हैं कि कि उनके भाई गुजरात में स्थित समय देव मंदिर में दर्शन के लिए गए हुए थे, जहां पर उन्होंने मन्नत मांगी थी और जब उनकी मन्नत पूरी हो गई थी। उन्होंने गुजरात की तरह ही कानपुर में भी समय देव का मंदिर बनवाया। उन्होंने इस मंदिर में गुजरात की तरह ही पहली बार घड़ी चढ़ाई. इसके बाद यह परंपरा बन गई।
बढ़ रही प्रसिद्धि:
लोगों की माने तो इस मंदिर की मान्यता है कि अगर आपका समय खराब चल रहा है और आप यहां आकर सच्चे मन से जो भी मन्नत मांगते हैं वह पूरी होती है। जब मन्नत पूरी हो जाती है तो भक्त प्रसाद में घड़ी अर्पित करते हैं। उन्होंने कहा कि इस मंदिर की प्रसिद्धि तेजी से बढ़ी है। यहां दूर-दूर से भक्त आते हैं। जिससे मंदिर में हर तरफ घड़ी ही घड़ी नजर आती है, मंदिर के पुजारी विष्णु ने बताया कि जब मंदिर में घड़ियां ज्यादा हो जाती हैं तो उन घड़ियों को प्रसाद के रूप में भक्तों में वितरित कर दिया जाता है।
(नोट: वतन केसरी किसी भी दावे का समर्थन नहीं करता है, यह खबर धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है।)